आम तौर पर हर्निया होने का मुख्य कारण पेट की दीवार का कमजोर होना होता है। पेट और जांघों के बीच जिस स्थान पर पेट की दीवार कमजोर पड़ जाती है, वहां आंत का एक हिस्सा बाहर की ओर निकल आता है। इसी स्थिति को आंत्र उतरना, आंत्रवृद्धि या हर्निया कहा जाता है। उस स्थान पर सूजन और दर्द महसूस हो सकता है।
सरल शब्दों में, जब एब्डॉमिनल वॉल का कोई कमजोर भाग भीतर के अंग को बाहर की ओर उभरने देता है, तो उसे हर्निया कहते हैं। यह समस्या जन्मजात भी हो सकती है, जिसे कॉनजेनाइटल हर्निया कहा जाता है। हर्निया किसी भी उम्र में हो सकता है।
अक्सर लोगों को लगता है कि हर्निया का एकमात्र इलाज सर्जरी है, इसलिए वे डॉक्टर के पास जाने से डरते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर हर्निया एक जैसा नहीं होता। शुरुआती और हल्के मामलों में सावधानी और सपोर्ट से लक्षण नियंत्रित किए जा सकते हैं, जबकि जटिल मामलों में सर्जरी ही सुरक्षित और प्रभावी उपचार होती है।
जब किसी व्यक्ति की आंत अपनी जगह से नीचे की ओर खिसकती है, तो अंडकोष के पास या जांघ के जोड़ में गांठ जैसी सूजन दिखाई दे सकती है। दबाने पर कभी-कभी भीतर से आवाज जैसी महसूस होती है। यह सूजन एक तरफ या दोनों तरफ हो सकती है। इसके साथ पेड़ू में भारीपन, सूजन और दर्द भी हो सकता है। कुछ मामलों में दर्द तेज होता है, जबकि कुछ लोगों को शुरू में दर्द नहीं भी होता।
यदि हर्निया में आंत फंस जाए, गांठ सख्त हो जाए, तेज दर्द, उल्टी या सूजन बढ़ जाए, तो यह आपात स्थिति हो सकती है और तुरंत ऑपरेशन जरूरी होता है। शुरुआती अवस्था में उभार को धीरे से पीछे किया जा सकता है, लेकिन ज्यादा जोर लगाना खतरनाक हो सकता है।
जिन लोगों की तोंद ज्यादा निकली हुई है, उन्हें वजन कम करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि पेट पर अधिक दबाव हर्निया को बढ़ा सकता है।
पारंपरिक घरेलू उपायों में अरंडी का तेल दूध में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग कॉफी पीने को भी लाभकारी मानते हैं। हालांकि इन उपायों के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
योग और जीवनशैली सुधार पर भी जोर दिया जाता है। गुनगुना पानी पीकर हल्की चाल से चलना, सूर्य नमस्कार और कपालभाति जैसी क्रियाएं कब्ज कम करने और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक मानी जाती हैं। क्योंकि पुराना कब्ज पेट पर दबाव बढ़ाकर हर्निया को बिगाड़ सकता है।
होम्योपैथिक पद्धति में सल्फर 200, आर्निका 200, नक्स वोमिका 200, कैल्केरिया कार्ब 200, एकोनाइट 30 और लाइकोपोडियम 30 जैसी दवाओं का उल्लेख मिलता है। इनका उपयोग केवल योग्य होम्योपैथ चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि हर्निया को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि सूजन बढ़ रही हो, दर्द तेज हो, उल्टी हो, या गांठ सख्त हो जाए, तो तुरंत सर्जन से जांच कराना जरूरी है। सही समय पर चिकित्सा परामर्श ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
सरल शब्दों में, जब एब्डॉमिनल वॉल का कोई कमजोर भाग भीतर के अंग को बाहर की ओर उभरने देता है, तो उसे हर्निया कहते हैं। यह समस्या जन्मजात भी हो सकती है, जिसे कॉनजेनाइटल हर्निया कहा जाता है। हर्निया किसी भी उम्र में हो सकता है।
अक्सर लोगों को लगता है कि हर्निया का एकमात्र इलाज सर्जरी है, इसलिए वे डॉक्टर के पास जाने से डरते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर हर्निया एक जैसा नहीं होता। शुरुआती और हल्के मामलों में सावधानी और सपोर्ट से लक्षण नियंत्रित किए जा सकते हैं, जबकि जटिल मामलों में सर्जरी ही सुरक्षित और प्रभावी उपचार होती है।
जब किसी व्यक्ति की आंत अपनी जगह से नीचे की ओर खिसकती है, तो अंडकोष के पास या जांघ के जोड़ में गांठ जैसी सूजन दिखाई दे सकती है। दबाने पर कभी-कभी भीतर से आवाज जैसी महसूस होती है। यह सूजन एक तरफ या दोनों तरफ हो सकती है। इसके साथ पेड़ू में भारीपन, सूजन और दर्द भी हो सकता है। कुछ मामलों में दर्द तेज होता है, जबकि कुछ लोगों को शुरू में दर्द नहीं भी होता।
यदि हर्निया में आंत फंस जाए, गांठ सख्त हो जाए, तेज दर्द, उल्टी या सूजन बढ़ जाए, तो यह आपात स्थिति हो सकती है और तुरंत ऑपरेशन जरूरी होता है। शुरुआती अवस्था में उभार को धीरे से पीछे किया जा सकता है, लेकिन ज्यादा जोर लगाना खतरनाक हो सकता है।
जिन लोगों की तोंद ज्यादा निकली हुई है, उन्हें वजन कम करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि पेट पर अधिक दबाव हर्निया को बढ़ा सकता है।
पारंपरिक घरेलू उपायों में अरंडी का तेल दूध में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग कॉफी पीने को भी लाभकारी मानते हैं। हालांकि इन उपायों के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
योग और जीवनशैली सुधार पर भी जोर दिया जाता है। गुनगुना पानी पीकर हल्की चाल से चलना, सूर्य नमस्कार और कपालभाति जैसी क्रियाएं कब्ज कम करने और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक मानी जाती हैं। क्योंकि पुराना कब्ज पेट पर दबाव बढ़ाकर हर्निया को बिगाड़ सकता है।
होम्योपैथिक पद्धति में सल्फर 200, आर्निका 200, नक्स वोमिका 200, कैल्केरिया कार्ब 200, एकोनाइट 30 और लाइकोपोडियम 30 जैसी दवाओं का उल्लेख मिलता है। इनका उपयोग केवल योग्य होम्योपैथ चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि हर्निया को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि सूजन बढ़ रही हो, दर्द तेज हो, उल्टी हो, या गांठ सख्त हो जाए, तो तुरंत सर्जन से जांच कराना जरूरी है। सही समय पर चिकित्सा परामर्श ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
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