जोड़ों के दर्द और यूरिक एसिड की समस्या है? डाइट में शामिल करें करेला, लेकिन ये लोग बरतें सावधानी

Journal of Ethnopharmacology के अनुसार करेले में कुछ ऐसे बायो-एक्टिव कंपाउंड मौजूद होते हैं जो जैंथिन ऑक्सीडेस नामक एंजाइम की गतिविधि को कम करते हैं। ये वही एंजाइम है जो शरीर में प्यूरीन को यूरिक एसिड में बदलते हैं।

हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, करेला यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। करेला औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी मानी जाती है। इसका सेवन खून को साफ रखने, सूजन कम करने और दर्द में राहत देने में मदद कर सकता है। 

यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे किडनी फिल्टर करके पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन जब किडनी सही तरह काम नहीं करती या शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगता है, तो यह खून में जमा होकर क्रिस्टल का रूप ले लेता है। ये क्रिस्टल जोड़ों में जमा होकर तेज दर्द, सूजन और लाली का कारण बनते हैं। यूरिक एसिड कंट्रोल करने में करेला की सब्जी बेहद असरदार साबित होती है। करेला स्वाद में कड़वा जरूर है लेकिन ये सेहत के लिए बहुत ज्यादा उपयोगी है। डायबिटीज के मरीजों के अलावा करेला यूरिक एसिड के मरीजों के लिए भी असरदार साबित होता है।

Journal of Ethnopharmacology के अनुसार करेले में कुछ ऐसे बायो-एक्टिव कंपाउंड मौजूद होते हैं जो जैंथिन ऑक्सीडेस नामक एंजाइम की गतिविधि को कम करते हैं। ये वही एंजाइम है जो शरीर में प्यूरीन को यूरिक एसिड में बदलते हैं। जब ये एंजाइम धीमा हो जाता है, तो शरीर में यूरिक एसिड का उत्पादन अपने आप कम होने लगता है। रिसर्च बताती है कि करेला किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इसमें मौजूद ड्यूरेटिक गुण शरीर में पेशाब की मात्रा को बढ़ाते हैं। इस सब्जी का सेवन करने से खून में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड के क्रिस्टल घुल जाते हैं और पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं। यह किडनी स्टोन के खतरे को भी कम करता है। आइए जानते हैं कि यूरिक एसिड बढ़ने पर बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं और करेला कैसे इन्हें कंट्रोल करता है।

यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण

हाई यूरिक के लक्षणों की बात करें तो इसमें पैर के अंगूठे में अचानक तेज दर्द होता है, जिसे गाउट कहा जाता है। इसके अलावा घुटनों, टखनों, कलाइयों और कोहनियों में भी सूजन और असहनीय दर्द हो सकता है।


करेला कैसे यूरिक एसिड की बीमारी में असरदार है?

हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, करेला यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। करेला औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी मानी जाती है। इसका सेवन खून को साफ रखने, सूजन कम करने और दर्द में राहत देने में मदद कर सकता है। करेला में बीटा कैरोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन C, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में योगदान देते हैं। हालांकि, यूरिक एसिड की समस्या में किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। यूरिक एसिड तब बढ़ता है जब शरीर प्यूरीन नामक तत्व को सही से पचा नहीं पाता।


2024 की एक रिसर्च के अनुसार करेले में मौजूद सक्रिय यौगिक प्यूरीन के ब्रेकडाउन को धीमा करते हैं, जिससे शरीर में यूरिक एसिड का उत्पादन कम होता है। करेले में ड्यूरेटिक (Diuretic) गुण होते हैं। शोध बताते हैं कि करेले का सेवन पेशाब की मात्रा बढ़ाता है, जिससे किडनी खून में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में अधिक सक्षम हो जाती है।

जब यूरिक एसिड हड्डियों के जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा हो जाता है, तो असहनीय दर्द और सूजन होती है। करेले में मोमोर्डिसिन (Momordicin) और जि़ंक जैसे तत्व होते हैं, जो जोड़ों की सूजन को कम करते हैं और गाउट के दर्द में राहत देते हैं। लिवर ही वो खास अंग है जहां यूरिक एसिड बनता है। रिसर्च के अनुसार करेला लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है और एंजाइम लेवल को संतुलित रखता है, जिससे यूरिक एसिड का स्तर अचानक नहीं बढ़ता।

यूरिक एसिड के लिए करेले के इस्तेमाल का सही तरीका

सुबह खाली पेट आधा कप करेले का जूस बनाकर पिएं आपको फायदा होगा। इसमें थोड़ा नींबू मिला सकते हैं।
सूखे करेले के टुकड़ों को पानी में उबालकर चाय की तरह पीने से भी यूरिक एसिड फिल्टर होता है।
करेले के छिलके में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे छीलें नहीं छिलको के साथ ही इसका सेवन करें।
डाइट से करें यूरिक एसिड का इलाज

जिन लोगों का यूरिक एसिड हाई होता है उन्हें रोज़ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, ताकि यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकल सके। डाइट में प्यूरीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे रेड मीट, कलौंजी, शराब और बीयर से परहेज करें। संतुलित आहार और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर यूरिक एसिड को कंट्रोल रखा जा सकता है।
ये लोग करें करेले से परहेज

करेला हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता। गर्भवती महिलाओं और लो-ब्लड शुगर (Hypoglycemia) के मरीजों को करेले के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर:

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

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