'भगवान शिव' को ही भेज दिया नोटिस! जयपुर के अफसर की इस हरकत पर मचा हड़कंप, सीएम ने लिया एक्शन
अक्सर कहा जाता है कि सरकारी काम में दिमाग कम और कागज ज्यादा चलता है, लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में जो हुआ, उसे सुनकर आप हैरान भी होंगे और हंसी भी आएगी। यहां जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने अतिक्रमण हटाने के जोश में सारी हदें पार कर दीं। अधिकारियों ने इंसान तो छोड़िये, भगवान को ही नोटिस भेज दिया।
मामला इतना तूल पकड़ गया कि सोशल मीडिया पर जनता ने मजे ले लिए और प्रशासन की जमकर क्लास लगाई। नतीजा यह हुआ कि जिस अधिकारी ने यह 'तुगलकी फरमान' जारी किया था, उसे अपनी नौकरी से सस्पेंड होना पड़ा।
क्या है पूरा माजरा?
यह किस्सा जयपुर के वैशाली नगर इलाके का है। वहां गांधी पथ पर सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। हाईकोर्ट का आदेश है कि सड़क 100 फीट चौड़ी होनी चाहिए। जेडीए (JDA) अपनी फीता और मशीनें लेकर नापजोख करने पहुंचा। इस दौरान कई दुकानें और मकान जद में आए, जिन्हें नोटिस दिए गए।
लेकिन रास्ते में एक प्राचीन शिव मंदिर भी था। अधिकारियों ने नापा तो पाया कि मंदिर की दीवार सड़क सीमा से करीब डेढ़ मीटर (1.59 मीटर) अंदर है। बस फिर क्या था, “नियम तो नियम हैं”-यह सोचकर उन्होंने एक नोटिस तैयार किया।
हैरानी तो तब हुई जब पता पड़ा कि नोटिस किसके नाम है!
नोटिस पर न तो पुजारी का नाम था, न ही किसी ट्रस्ट का। उस पर साफ़-साफ़ लिखा था- "बनाम: भगवान शिव"।
नोटिस में महादेव को आदेश दिया गया कि- "आप 21 नवंबर को जारी इस नोटिस का जवाब 7 दिनों के भीतर (28 नवंबर तक) दें। अपने दस्तावेज लेकर आएं और बताएं कि आप वहां क्यों विराजमान हैं? अगर आप नहीं आए, तो हम कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।"
जब जेडीए वाले यह कागज लेकर मंदिर पहुंचे, तो पुजारी भी सन्न रह गए। उन्होंने नोटिस लेने से साफ मना कर दिया। अब सरकारी कर्मचारी भी कहाँ मानने वाले थे, उन्होंने वह कागज ले जाकर भगवान के मंदिर की दीवार पर ही चिपका दिया।
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और व्यंग्य
जैसे ही दीवार पर चिपके नोटिस की तस्वीर वायरल हुई, बवाल मच गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखना शुरू कर दिया-"क्या अब भगवान शिव को अपने आधार कार्ड लेकर जेडीए दफ्तर जाना पड़ेगा?"
"लगता है अधिकारी भांग के नशे में थे।"
इसे 'आस्था बनाम प्रशासन' का मजाक बताया गया।
लोगों का कहना था कि मंदिर बरसों पुराना है और स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। प्रशासन कम से कम ट्रस्ट या पुजारी से बात कर सकता था, भगवान को कानूनी नोटिस भेजना उनकी भावनाओं का अपमान है।
सरकार जागी और अफसर नपे
मामला जब अखबारों और टीवी पर उछला, तो बात सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँच गई। सरकार को यह बहुत ही असंवेदनशील और लापरवाही भरा कदम लगा। तुरंत आदेश जारी हुए और जेडीए सचिव निशांत जैन ने प्रवर्तन अधिकारी (Enforcement Officer) अरुण पूनिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
निलंबन आदेश में साफ लिखा गया कि अधिकारी ने "मनमानी और लापरवाही" की है। यह घटना यह सिखाती है कि कुर्सी पर बैठकर सिर्फ नियम चलाना ही काफी नहीं है, थोड़ी कॉमन सेंस यानी 'व्यावहारिक बुद्धि' भी बहुत जरूरी है।
मामला इतना तूल पकड़ गया कि सोशल मीडिया पर जनता ने मजे ले लिए और प्रशासन की जमकर क्लास लगाई। नतीजा यह हुआ कि जिस अधिकारी ने यह 'तुगलकी फरमान' जारी किया था, उसे अपनी नौकरी से सस्पेंड होना पड़ा।
क्या है पूरा माजरा?
यह किस्सा जयपुर के वैशाली नगर इलाके का है। वहां गांधी पथ पर सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। हाईकोर्ट का आदेश है कि सड़क 100 फीट चौड़ी होनी चाहिए। जेडीए (JDA) अपनी फीता और मशीनें लेकर नापजोख करने पहुंचा। इस दौरान कई दुकानें और मकान जद में आए, जिन्हें नोटिस दिए गए।
लेकिन रास्ते में एक प्राचीन शिव मंदिर भी था। अधिकारियों ने नापा तो पाया कि मंदिर की दीवार सड़क सीमा से करीब डेढ़ मीटर (1.59 मीटर) अंदर है। बस फिर क्या था, “नियम तो नियम हैं”-यह सोचकर उन्होंने एक नोटिस तैयार किया।
हैरानी तो तब हुई जब पता पड़ा कि नोटिस किसके नाम है!
नोटिस पर न तो पुजारी का नाम था, न ही किसी ट्रस्ट का। उस पर साफ़-साफ़ लिखा था- "बनाम: भगवान शिव"।
नोटिस में महादेव को आदेश दिया गया कि- "आप 21 नवंबर को जारी इस नोटिस का जवाब 7 दिनों के भीतर (28 नवंबर तक) दें। अपने दस्तावेज लेकर आएं और बताएं कि आप वहां क्यों विराजमान हैं? अगर आप नहीं आए, तो हम कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।"
जब जेडीए वाले यह कागज लेकर मंदिर पहुंचे, तो पुजारी भी सन्न रह गए। उन्होंने नोटिस लेने से साफ मना कर दिया। अब सरकारी कर्मचारी भी कहाँ मानने वाले थे, उन्होंने वह कागज ले जाकर भगवान के मंदिर की दीवार पर ही चिपका दिया।
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और व्यंग्य
जैसे ही दीवार पर चिपके नोटिस की तस्वीर वायरल हुई, बवाल मच गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखना शुरू कर दिया-"क्या अब भगवान शिव को अपने आधार कार्ड लेकर जेडीए दफ्तर जाना पड़ेगा?"
"लगता है अधिकारी भांग के नशे में थे।"
इसे 'आस्था बनाम प्रशासन' का मजाक बताया गया।
लोगों का कहना था कि मंदिर बरसों पुराना है और स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। प्रशासन कम से कम ट्रस्ट या पुजारी से बात कर सकता था, भगवान को कानूनी नोटिस भेजना उनकी भावनाओं का अपमान है।
सरकार जागी और अफसर नपे
मामला जब अखबारों और टीवी पर उछला, तो बात सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँच गई। सरकार को यह बहुत ही असंवेदनशील और लापरवाही भरा कदम लगा। तुरंत आदेश जारी हुए और जेडीए सचिव निशांत जैन ने प्रवर्तन अधिकारी (Enforcement Officer) अरुण पूनिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
निलंबन आदेश में साफ लिखा गया कि अधिकारी ने "मनमानी और लापरवाही" की है। यह घटना यह सिखाती है कि कुर्सी पर बैठकर सिर्फ नियम चलाना ही काफी नहीं है, थोड़ी कॉमन सेंस यानी 'व्यावहारिक बुद्धि' भी बहुत जरूरी है।
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